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Sufi Hamari Fufi

Sufi Hamari Fufi

सूफी हमारी फूफी
Publisher: Eklavya
Author: Sushil Shukla
Illustrator: Kanak Shashi
ISBN: 978-93-48-176-81-3
Binding: Paperback
Language: Hindi
Pages: 16
Published: 2025-08-01 00:00:00 +0530
Regular price $4.00 USD
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कितना अच्छा लिखती हो फूफी, माशा-अल्लाह ! मैं भी एक दिन कवि बनूँगी, इंशा-अल्लाह !!

जब सब्बू अपनी फूफी को शब्दों और कल्पनाओं की दुनिया में खोया देखती, तो उसके भीतर भी एक ख्वाहिश जाग उठती – कुछ कहने की, कुछ लिखने की, फूफी की दुनिया का हिस्सा बनने की।

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Madhuri Kumari
सादगी और शब्दों का जादू

अक्सर हम बड़ी कहानियों के चक्कर में घर के छोटे-छोटे खूबसूरत पलों को भूल जाते हैं। यह कविता उन्हीं पलों को सहेजती है। इसे पढ़ते समय ऐसा लगता है जैसे हमारे सामने कोई फिल्म चल रही हो। नीली कमीज, चश्मा और कहानियों का जिक्र मन को मोह लेता है। शब्दों का चुनाव इतना आसान है कि कोई भी बच्चा या बड़ा इसे आसानी से समझ सकता है।
सबसे प्यारा हिस्सा वह है जहाँ छोटी 'सब्बू' अपनी फूफी से प्रेरित होकर अपनी डायरी लिखती है। यह कविता दिखाती है कि कैसे एक पीढ़ी दूसरी पीढ़ी को अनजाने में ही बड़े सपने देखना सिखा देती है। बच्चों और बड़ों दोनों के लिए एक शानदार और सुकून देने वाली रचना!

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सादगी और शब्दों का जादू

अक्सर हम बड़ी कहानियों के चक्कर में घर के छोटे-छोटे खूबसूरत पलों को भूल जाते हैं। यह कविता उन्हीं पलों को सहेजती है। इसे पढ़ते समय ऐसा लगता है जैसे हमारे सामने कोई फिल्म चल रही हो। नीली कमीज, चश्मा और कहानियों का जिक्र मन को मोह लेता है। शब्दों का चुनाव इतना आसान है कि कोई भी बच्चा या बड़ा इसे आसानी से समझ सकता है।
सबसे प्यारा हिस्सा वह है जहाँ छोटी 'सब्बू' अपनी फूफी से प्रेरित होकर अपनी डायरी लिखती है। यह कविता दिखाती है कि कैसे एक पीढ़ी दूसरी पीढ़ी को अनजाने में ही बड़े सपने देखना सिखा देती है। बच्चों और बड़ों दोनों के लिए एक शानदार और सुकून देने वाली रचना!