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Naach

Naach

नाच
Publisher: Eklavya
Author: Navnit Nirav
Illustrator: Naresh Paswan
ISBN: 978-93-48173-16-5
Binding: Paperback
Language: Hindi
Pages: 72
Published: 2025-07-01 00:00:00 +0530
Regular price $4.00 USD
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नाच अद्भुत संवेदनशीलता के साथ रची और बुनी गई कहानी है। लेखक ने कमाल लिखा है।

राजेन्द्र गुप्ता मशहूर अभिनेता व निर्देशक

"नाच बनना है तुमको... नाच। ये नचनिया-वचनिया बनने का विचार छोड़ दो, नहीं तो हमारे घर से निकल जाओ।"

"ये लड़की-वड़की बनके खेला करना कौनो अच्छी बात है क्या? हमारी कसम खाकर कहो कि आज के बाद ये लड़की-वड़की नहीं बनोगे? नचनिया कभी नहीं बनोगे।"

सरोज की बहुत-सी बातें जाहिर नहीं थीं। वह अपने हमउम्र साथियो से ज्यादा संवेदनशील था। उसकी सोच, उसकी चाहते, उसकी इच्छाएँ... सबकुछ एक अनकहा साज था। पर अफसोस कि उस साज को कभी कोई समझ नहीं पाया ना माँ की ममता, ना पिता की खामोशी और ना ही अलगाव करने वाला समाज।

यह किताब एक सफर है सरोज का। खुद को ढूँढते हुए सरोज एक ऐसी दुनिया की तलाश में हैं, जहाँ उनके लिए और उनके जैसे तमाम लोगों के लिए प्यार व अपनापन हो।

आइए, इस सफर में हमकदम बनिए..

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R
Raksha Geeta
मार्मिक यात्रा

"सरोज का एक मार्मिक सफ़र" एक संवेदनशील कहानी

ड
डॉ कुमारी उर्वशी' प्राध्यापिका हिंदी विभाग, रांची विमेंस कॉलेज, रांची !
पुस्तक समीक्षा: नवनीत नीरव का ‘नाच’- कला, जाति और अस्मिता का चक्रव्यूह

आज यहां नवनीत नीरव के पहले उपन्यास ‘नाच’ पर बात कर रही हैं- उर्वशी। युवा कहानीकार नवनीत नीरव एक शिक्षा और प्रबंधन पेशेवर हैं, जो बच्चों में पढ़ने की आदत विकास के मिशन पर हैं। पिछले डेढ़ दशक से वे प्रारंभिक शिक्षा, बाल साहित्य और पुस्तकालय विकास के लिए देश के विभिन्न सुदूरवर्ती क्षेत्रों में सक्रिय रहे हैं। उन्होंने विभिन्न भारतीय भाषाओं में बाल साहित्य को समृद्ध करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। बच्चों के लिए उनकी चार चित्र पुस्तकें अब तक प्रकाशित हो चुकी हैं।
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पूरी समीक्षा पढ़ने के लिए इस लिंक पर जाये !
https://bolebharat.in/book-review-of-navneet-niravs-nach-a-maze-of-art-caste-and-identity/

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आज यहां नवनीत नीरव के पहले उपन्यास ‘नाच’ पर बात कर रही हैं- उर्वशी। युवा कहानीकार नवनीत नीरव एक शिक्षा और प्रबंधन पेशेवर हैं, जो बच्चों में पढ़ने की आदत विकास के मिशन पर हैं। पिछले डेढ़ दशक से वे प्रारंभिक शिक्षा, बाल साहित्य और पुस्तकालय विकास के लिए देश के विभिन्न सुदूरवर्ती क्षेत्रों में सक्रिय रहे हैं। उन्होंने विभिन्न भारतीय भाषाओं में बाल साहित्य को समृद्ध करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। बच्चों के लिए उनकी चार चित्र पुस्तकें अब तक प्रकाशित हो चुकी हैं।
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