Jamlo Chalti Gayi
Jamlo Chalti Gayi
Publisher: Eklavya
Author: Samina Mishra / समीना मिश्रा
Translator: Sushil Joshi / सुशील जोशी
Illustrator: Tarik Aziz / तारिक अज़ीज़
ISBN: 978-93-91132-14-9
Binding: Paperback
Language: Hindi
Pages: 0
Published: 2021.0
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आज लॉकडाउन का सातवाँ दिन है। सड़क लम्बी व सुनसान है। दुनिया थम-सी गई है। सारा कामकाज ठप हो चुका है और लोगों की ज़ुबान पर हरदम ‘कोरोना’ शब्द है। जामलो सैकड़ों आदमियों, औरतों और बच्चों के साथ एक लम्बी और तपती सड़क पर चल पड़ी है। और चलती जाती है...एक ऐसी दुनिया में जहाँ न्याय और समानता की ज़रूरत है।

- 5 stars: 2 (100%)
- 4 stars: 0 (0%)
- 3 stars: 0 (0%)
- 2 stars: 0 (0%)
- 1 star: 0 (0%)
This book holds Jamlo's story so tenderly and allows young readers to engage with it. The illustrations are evocative and thoughtful. I loved the book!
लॉकडाउन के दौरान प्रवासी मज़दूर का क्या हुआ यह बहुत बोला गया और टीवी पर दिखाया गया । जमालो की कहानी उसी लंबे सफ़र की है जो घर के लिए शुरू हुआ था । जमालो घर जा नहीं पायी । बहुत ही मार्मिक कहानी जो हृदयस्पर्शीय है ।
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This book holds Jamlo's story so tenderly and allows young readers to engage with it. The illustrations are evocative and thoughtful. I loved the book!
लॉकडाउन के दौरान प्रवासी मज़दूर का क्या हुआ यह बहुत बोला गया और टीवी पर दिखाया गया । जमालो की कहानी उसी लंबे सफ़र की है जो घर के लिए शुरू हुआ था । जमालो घर जा नहीं पायी । बहुत ही मार्मिक कहानी जो हृदयस्पर्शीय है ।