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Ghar Ka Sapna

Ghar Ka Sapna

घर का सपना
Publisher: Eklavya
Author: Farideh Khalatbari
Illustrator: Ali Mafakheri
ISBN: 978-93-91132-18-7
Binding: Paperback
Language: Hindi
Pages: 32
Published: 2021.0
Regular price $6.00 USD
Regular price Sale price $6.00 USD
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एक घर की चाह थी कि उसे ऐसा कोई परिवार मिले जो हमेशा उसके साथ रहे जैसे उसके पड़ोसी घर में रहते थे| अपनी इस चाह को पूरी करने के लिए घर ने अपना दिमाग लगाया| क्या घर की मेहनत एक ऐसा परिवार ला पाएगी, जो हमेशा उसके साथ रहे?


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K
Kumud Wadhwani
Book review

घर का सपना एक बहुत दिलचस्प और सुंदर किताब है । बच्चों को ज़रूर अच्छी लगेगी

S
Simran uikey
घर को छोटा परिवार मिल गया।

यह कहानी घर की है। घर का सपना होता है, की घर में ऐसे परिवार रहे जो कभी घर को छोड़ कर कही नही जाए। जैसे हम लोगो का भी सपना होता है, की हमारा भी खुद का एक घर हो जिसे हम कभी छोड़ कर न जाए। किराए के घर पर हम ज्यादा समय तक रह नही पाते है, लेकिन जिस घर में हम रहते हैं, हमे उस घर से लगाव हो जाता है। लेकिन एक न एक दीन हम किराए के घर को छोड़ कर चले जाते है। तब हमे बहुत बूरा लगता है और दुःख होता है की हम क्यों जा रहे है। वैसे ही घर को भी बूरा लगता है,की लोग आते है और रहते है फिर चले जाते है। इसलिए उसका सपना होता है की ऐसे परिवार उसके घर में आ कर रहे जो उसे छोड़ कर कभी नही जाए।
एक छोटा परिवार आता है और घर का सपना पुरा हो जाता है।

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Kumud Wadhwani
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घर का सपना एक बहुत दिलचस्प और सुंदर किताब है । बच्चों को ज़रूर अच्छी लगेगी

S
Simran uikey
घर को छोटा परिवार मिल गया।

यह कहानी घर की है। घर का सपना होता है, की घर में ऐसे परिवार रहे जो कभी घर को छोड़ कर कही नही जाए। जैसे हम लोगो का भी सपना होता है, की हमारा भी खुद का एक घर हो जिसे हम कभी छोड़ कर न जाए। किराए के घर पर हम ज्यादा समय तक रह नही पाते है, लेकिन जिस घर में हम रहते हैं, हमे उस घर से लगाव हो जाता है। लेकिन एक न एक दीन हम किराए के घर को छोड़ कर चले जाते है। तब हमे बहुत बूरा लगता है और दुःख होता है की हम क्यों जा रहे है। वैसे ही घर को भी बूरा लगता है,की लोग आते है और रहते है फिर चले जाते है। इसलिए उसका सपना होता है की ऐसे परिवार उसके घर में आ कर रहे जो उसे छोड़ कर कभी नही जाए।
एक छोटा परिवार आता है और घर का सपना पुरा हो जाता है।