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Bandar Ka Kunba

Bandar Ka Kunba

बंदर का कुनबा
Publisher: Eklavya
Author: Prabhat
Illustrator: Rohan Chakravarti
ISBN: 978-93-48176-25-7
Binding: Paperback
Language: Hindi
Pages: 16
Published: 2025-05-01 00:00:00 +0530
Regular price $4.00 USD
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कुनबा पाता किया बंदर का

कुनबे मे सब निकले बंदर

पढ़िये ,

मुस्कुराइए,

मत शर्माइए,

अपने अंदर के

बंदर को जगाइए और

बंदर के कुनबे मे

वापस आ जाइए !

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M
Madhuri
बन्दर ही बन्दर

यह एक बहुत ही सरल लेकिन असरदार कविता है। इस कविता की सबसे बड़ी खूबी इसकी लय है। पढ़ते समय ऐसा लगता है जैसे हम कोई मज़ेदार खेल खेल रहे हों। चाची, ताई, बच्चा, बच्ची—सबका बन्दर होना पढ़कर बहुत मज़ा आता है। भाषा इतनी आसान है कि घर के बड़े भी बच्चों के साथ इसे गाकर पढ़ सकते हैं। मस्ती से भरपूर एक शानदार किताब!

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बन्दर ही बन्दर

यह एक बहुत ही सरल लेकिन असरदार कविता है। इस कविता की सबसे बड़ी खूबी इसकी लय है। पढ़ते समय ऐसा लगता है जैसे हम कोई मज़ेदार खेल खेल रहे हों। चाची, ताई, बच्चा, बच्ची—सबका बन्दर होना पढ़कर बहुत मज़ा आता है। भाषा इतनी आसान है कि घर के बड़े भी बच्चों के साथ इसे गाकर पढ़ सकते हैं। मस्ती से भरपूर एक शानदार किताब!