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Baingan Nahin Aaye! aur Phans Gaya Pecha!
Baingan Nahin Aaye! aur Phans Gaya Pecha!
Author: Upasana Dipti
Binding: Paperback
Language: Hindi
Pages: 91
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धनिया तो हँस रही
टमाटर शरमाए मूली भी खिल गई पर बैंगन नहीं आए बैंगन नहीं आए, भई बैंगन नहीं आए
पेश-ए-खिचत है दो नाटक। इनमें बच्चों की शरारत है तो किशोर-किशोरियों के मन की उथल-पुथल भी। ये नाटक न सिर्फ आपको हँसाएँगे बल्कि आपके अन्दर एक उधेड़बुन भी जगाएँगे। इन नाटकों का लुत्फ उठाते हुए अपने भीतर के कलाकार को आवाज़ दीजिए।
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टमाटर शरमाए मूली भी खिल गई पर बैंगन नहीं आए बैंगन नहीं आए, भई बैंगन नहीं आए
पेश-ए-खिचत है दो नाटक। इनमें बच्चों की शरारत है तो किशोर-किशोरियों के मन की उथल-पुथल भी। ये नाटक न सिर्फ आपको हँसाएँगे बल्कि आपके अन्दर एक उधेड़बुन भी जगाएँगे। इन नाटकों का लुत्फ उठाते हुए अपने भीतर के कलाकार को आवाज़ दीजिए।
