{"product_id":"shiksha-me-badlaav-ka-savaal-samajik-anubhavon-se-neeti-tak","title":"Shiksha Me Badlaav Ka Savaal -Samajik Anubhavon Se Neeti Tak","description":"\u003cp\u003e \u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eअनिल सद्गोपाल का शिक्षाशास्त्र उनके अनुभव और संघर्ष से उपजा है, इसलिए गहन और अनोखा है। मैं उनकी दृष्टि और सोच को समझने का प्रयास जब भी करता हूँ, हमेशा कुछ नया पाता हूँ- खासकर बदलाव के सवाल पर। उनकी यह किताब बदलाव को शिक्षा, समाज और देश के व्यापक सन्दर्भ में रखकर टटोलती है और इस बात की गहरी चिन्ता जगाती है कि समता और न्याय के मूल्यों से दूर जा रही शिक्षा समाज में किस तरह का बदलाव लाएगी। अनिल सद्गोपाल का लेखन हमें अपने समय के एक ऐसे शिक्षाविद् से बात करने का आमंत्रण है जिसने अन्तर्विरोधों के विश्लेषण से नई राहें निकालने का प्रयास कभी नहीं छोड़ा।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eकृष्ण कुमार\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eआम तौर पर स्वैच्छिक संस्थाओं में काम करने वाले लोग अपने समृद्ध सामाजिक अनुभवों को राष्ट्रीय मुद्दों और नीतिगत सवालों से जोड़ नहीं पाते। यह किताब इस लीक से हटकर काम करने और वैज्ञानिक चिन्तन का परिणाम है। बात चाहे शिक्षा में परिवर्तन की हो या शिक्षा के ज़रिए सामाजिक बदलाव की, अक्सर लोग इसका समाधान किसी स्वैच्छिक संस्था का निर्माण करके अथवा चन्द स्कूलों में नवाचार में खोजते रहे हैं। इस किताब में काफी लम्बे सामाजिक अनुभव और आन्दोलन के विश्लेषण के आधार पर स्वैच्छिक संस्थाओं के कार्यक्षेत्र के इस भ्रम को चुनौती दी गई है। साथ ही लेखक ने राष्ट्रीय स्तर पर अनेक शैक्षिक आयोगों, समितियों और अन्य मंचों से हिस्सेदारी के दौरान जो सीखा है, उनकी सीमाओं और सम्भावनाओं की वस्तुनिष्ठ व्याख्या भी प्रस्तुत की गई है।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eइस किताब में ज़ोरदार वकालत की गई है कि आज़ादी के 79 साल बाद भी शिक्षा के बदलाव और औपनिवेशिक ढाँचे में फँसे रहने का असली कारण देश में अपनाई गई शिक्षा नीतियों में अन्तर्निहित विरोधाभासों और विकृतियों में खोजा जा सकता है।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eशिक्षा पर भूमण्डलीकरण और बाज़ारीकरण के प्रभावों तथा हाल में भारतीय स्कूल व्यवस्था में विश्व बैंक की दखलन्दाज़ी के कारण बढ़ते हुए राष्ट्रीय संकट के प्रति हम सबको सतर्क किया गया है। आज के शैक्षिक हालात को बदलने के लिए यह किताब एक ज़रूरी परिप्रेक्ष्य तथा विकास की रूपरेखा भी पेश करत है। भारतीय शिक्षा के सुधार और भारत के नवनिर्माण में दिलचस्पी रखने वाव हर व्यक्ति को यह किताब प्रेरित करेगी।\u003c\/p\u003e","brand":"Eklavya","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":45219221635125,"sku":"9788199299597","price":15.0,"currency_code":"USD","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0713\/0031\/7237\/files\/Shiksha_Me_Badlav.png?v=1778741071","url":"https:\/\/eklavyapitara.com\/products\/shiksha-me-badlaav-ka-savaal-samajik-anubhavon-se-neeti-tak","provider":"Eklavya PitaraKART","version":"1.0","type":"link"}