{"product_id":"rang-barsayo-re","title":"Rang Barsayo Re","description":"\u003cp\u003eइन रेखांकनों में वहीं फोर्स है जो कुमारजी की गायकी का वैशिष्ट्य था। मैं ये रेखांकन बनाते समय कुमास्नी को नहीं उनके गायन को देखता था। गरज ये कि जहाँ कुमारजी का सुर गया और जहाँ श्वास की स्पेस बहीं मैं वहीं अपनी पेंसिल रोक देता था। जहाँ-जहाँ स्क्रैच में तीखापन है वहाँ-वहाँ कुमारजी ने साँस ली है। मैंने यह भी गौर किया था कि अलग-अलग राग गाते समय कुमारजी की देहभावा अलग-अलग होती थी... ये वाकई एक विलक्षण बात है। जैसे तोड़ी में एक खास किस्म का गाम्भीर्य है तो बागेश्री या बिहाग गाते समय एक अलौकिक आनन्द की सृष्टि हो रही है कुमारजी के भावों में।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eविष्णुचिंचाल्लकर\u003c\/p\u003e","brand":"Eklavya","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":45219193913397,"sku":"9789348176134","price":2.0,"currency_code":"USD","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0713\/0031\/7237\/files\/Untitled_design_-_2025-08-18T130923.760.png?v=1778740118","url":"https:\/\/eklavyapitara.com\/products\/rang-barsayo-re","provider":"Eklavya PitaraKART","version":"1.0","type":"link"}