{"product_id":"karke-dekha-samajh-gaya","title":"Karke Dekha, Samajh Gaya","description":"\u003cp\u003e'करके देखा' - होशंगाबाद विज्ञान शिक्षण कार्यक्रम (होविशिका) की शुरुआत से लेकर अब तक, इतने सालों में यह अनगिनत बार लिखा, पढ़ा, कहा और सुना जा चुका होगा। मगर करके क्यों देखा? करके देखने पर क्या दिखा? 1985 में, एकलव्य के 'करके सीखो विज्ञान' प्रशिक्षण के एक शिविर में इसी कौतूहल के साथ सुभाष गांगुली शामिल हुए। उन्होंने भी करके देखा और जो कुछ समझा, सीखा, जाना - इस कार्यक्रम की प्रक्रिया और विशेषताओं की सम्भावना, प्रासंगिकता, खूबियाँ, खामियाँ, औचित्य - वह इस किताब के लेखों में लिख डाला।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eयह किताब होविशिका के 50 साल और एकलव्य के 40 साल पूरे होने के मौके पर ज्ञान-विज्ञान के अलग- अलग क्षेत्रों से जुड़ी किताबों की श्रृंखला में एक कड़ी के रूप में प्रकाशित की जा रही है।\u003c\/p\u003e","brand":"Eklavya","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":45219192832053,"sku":"9788119771844","price":2.0,"currency_code":"USD","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0713\/0031\/7237\/files\/Paperback_57.png?v=1778740055","url":"https:\/\/eklavyapitara.com\/products\/karke-dekha-samajh-gaya","provider":"Eklavya PitaraKART","version":"1.0","type":"link"}