{"product_id":"bhasha-seekhne-sikhane-ka-paripekshya-paperback","title":"Bhasha Seekhne-Sikhane Ka Pariprekshya","description":"\u003cdiv id=\"tab-description\" class=\"tab-pane active\"\u003e\n\u003cdiv style=\"font-family: trebuchet ms,sans-serif; font-size: small;\" class=\"gmail_default\"\u003e \u003cbr\u003e\n\u003c\/div\u003e\n\u003c\/div\u003e\n\u003cp style=\"text-align: center;\"\u003eभाषा के साथ इन्सान के सम्बन्ध, शिशुओं द्वारा परिवेश से भाषा अर्जन, भाषा और उसके संरचनात्मक पहलुओं के बारे में समझ बच्चों को औपचारिक रूप से भाषा सीखने में मदद करने के प्रयास से जुड़े हैं और उसे प्रभावित करते हैं। पिछले सात दशकों में बच्चों को भाषा सिखाने के तरीकों व भाषा सीखने की उनकी क्षमताओं के बारे में सोचने के ढंग में व्यापक परिवर्तन आए हैं। इस परिवर्तन की झलक भारत के स्कूली शिक्षा से सम्बन्धित राष्ट्रीय दस्तावेज़ों में भी साफ तौर पर दिखाई देती है।\u003c\/p\u003e\n\u003cp style=\"text-align: center;\"\u003eयह संकलन इस परिवर्तन और इससे जुड़े विमर्श को सरल भाषा में उदाहरणों के साथ प्रस्तुत करने का प्रयास करता है। साथ ही, यह कक्षा में भाषा शिक्षण से जुड़े विविध परिप्रेक्ष्यों को भी हमारे सामने लाता है। भाषा सीखने के बारे में प्रचलित समझ और नीतियों की विवेचना करते हुए संकलन यह दिखाता है कि नए परिप्रेक्ष्य को आधार बनाकर कक्षा में भाषा शिक्षण कैसे हो सकता है और उसके लिए शिक्षकों को किस तरह से तैयार किया जाना चाहिए। उम्मीद है कि इससे शिक्षकों व शिक्षा के क्षेत्र में कार्यरत अन्य लोगों को भाषा सीखने-सिखाने को लेकर अपने नज़रिए में विस्तार करने में मदद मिलेगी।\u003c\/p\u003e","brand":"Eklavya","offers":[{"title":"Paperback","offer_id":45219202367541,"sku":"9789348176714","price":12.0,"currency_code":"USD","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0713\/0031\/7237\/files\/1_d1893ae9-7875-4df9-9297-44602d530019.png?v=1778740787","url":"https:\/\/eklavyapitara.com\/products\/bhasha-seekhne-sikhane-ka-paripekshya-paperback","provider":"Eklavya PitaraKART","version":"1.0","type":"link"}